
अनुभव
पहाड़ी जीवन की लय में जिएँ।
न कोई समय-सारणी, न कोई तय कार्यक्रम। बस एक नज़ारा, एक रसोई, एक तंदूर और घूमने के लिए पूरा गाँव।
दिन बिताने के तरीके
समय के हिसाब से चुनें।
ज़्यादातर घर से ही शुरू होता है, और सब कुछ आपकी अपनी रफ़्तार से।
सेलूर में एक दिन
समय कैसे बीतता है।

सुबह 6:00
बरामदे पर सूर्योदय
नमूना कार्यक्रम
कितने दिन रुकना चाहिए?
सच कहें तो: जितना सोचा उससे ज़्यादा। देखिए दो, तीन और पाँच रातें कैसी लगती हैं।
दिन 1
- पहुँचिए और आराम से बस जाइए
- गाँव की सैर
- तंदूर वाली शाम
दिन 2
- सूर्योदय
- सीढ़ीदार खेत देखिए
- बरामदे पर दोपहर
- तारे देखना
दिन 3
- एक दिन की सैर: कानाताल, सुरकंडा देवी और धनोल्टी
- रसोई में रात का खाना
दिन 4
- धीमी सुबह
- घर वापसी

यह सब अनुभव करने के लिए तैयार हैं?
नज़ारा, रसोई, तंदूर और गाँव, सब आपके ठहराव का हिस्सा हैं। बाकी पहाड़ों पर छोड़ दीजिए।